पाठ्यक्रम: जीएस-2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- भारत और श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अद्यतन करने संबंधी वार्ताओं को आगे बढ़ाने तथा शीघ्र ही सामाजिक सुरक्षा समझौते (Social Security Pact) पर हस्ताक्षर करने पर सहमत हुए हैं।
प्रमुख बिंदु
- भारत के दौरे पर आए भारतीय विदेश सचिव और श्रीलंका के राष्ट्रपति के बीच हुई वार्ता में पारस्परिक हितों के मुद्दों तथा प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा पर चर्चा हुई।
- दोनों पक्षों ने 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लिए भारतीय रुपये (INR) में नामित ऋण सहायता (Lines of Credit – LoCs) से संबंधित समझौतों का आदान-प्रदान किया, जो चक्रवात डिटवाह (Cyclone Ditwah) के बाद भारत द्वारा प्रदान किए गए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा हैं।
- इन LoCs का उपयोग चक्रवात के बाद उत्पन्न पुनर्निर्माण, अवसंरचना विकास तथा खरीद संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाएगा।
- दोनों पक्ष विद्युत ग्रिड अंतर-संपर्क परियोजना, सम्पूर सौर ऊर्जा परियोजना तथा त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र (Energy Hub) के रूप में विकसित करने की परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर सहमत हुए।
भारत–श्रीलंका संबंध
- राजनयिक संबंध: श्रीलंका की स्वतंत्रता के बाद 1948 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
- व्यापारिक संबंध: भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA), जो वर्ष 2000 में लागू हुआ, ने दोनों देशों के बीच व्यापार के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- भारत परंपरागत रूप से श्रीलंका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है और श्रीलंका, सार्क (SAARC) के भीतर भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है।
- भारत, श्रीलंका में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से भी एक है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार (Merchandise Trade) 7.18 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 5.52 अरब अमेरिकी डॉलर तथा श्रीलंका का निर्यात 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर था।
- वस्तुओं एवं सेवाओं दोनों को शामिल करने वाले आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (ETCA) को अंतिम रूप देने के लिए वार्ताएँ 2023 में पाँच वर्ष के अंतराल के बाद पुनः प्रारंभ हुईं।
- सांस्कृतिक संबंध: 1977 में हस्ताक्षरित सांस्कृतिक सहयोग समझौता दोनों देशों के बीच समय-समय पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आधार है।
- पर्यटन: भारत परंपरागत रूप से श्रीलंका के लिए सबसे बड़ा विदेशी पर्यटक स्रोत रहा है, जिसके बाद चीन का स्थान है।
- वर्ष 2025 में भारत से लगभग 5.31 लाख पर्यटक श्रीलंका पहुँचे, जो वहाँ के कुल पर्यटक आगमन का 22.5% था।
- समुद्री सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग: 2011 में कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (Colombo Security Conclave) की स्थापना का निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
- भारत और श्रीलंका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मित्र शक्ति’, त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘दोस्ती’ तथा नौसैनिक अभ्यास SLINEX आयोजित करते हैं।
- संपर्क (कनेक्टिविटी) परियोजनाएँ: हाल ही में दोनों देशों ने समुद्री, ऊर्जा तथा जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ करने हेतु एक दृष्टि-पत्र (Vision Document) अपनाया।
- दोनों देशों के बीच स्थलीय पुल (Land Bridge) विकसित करने की योजना है, जिससे भारत को त्रिंकोमाली और कोलंबो बंदरगाहों तक स्थलीय पहुँच प्राप्त होगी तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- इस व्यवस्था के अंतर्गत महत्वपूर्ण परियोजनाओं में नागपट्टिनम (तमिलनाडु) और कांकेसनथुरई (श्रीलंका) के बीच फेरी सेवा का संचालन शामिल है।
- कांकेसनथुरई बंदरगाह के विकास हेतु भारत सरकार ने श्रीलंका सरकार को 65 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान प्रदान किया है।
- बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: भारत और श्रीलंका दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC), दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम, दक्षिण एशियाई आर्थिक संघ तथा बिम्सटेक (BIMSTEC) जैसे अनेक क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय संगठनों के सदस्य हैं और सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए मिलकर कार्य करते हैं।
चिंता के क्षेत्र
- मछुआरों का मुद्दा: श्रीलंका की भारतीय समुद्री सीमा से निकटता के कारण मछलियों की तलाश में दोनों देशों के मछुआरे अक्सर समुद्री सीमाओं का उल्लंघन कर देते हैं।
- वर्ष 2016 से इस समस्या के समाधान हेतु मत्स्य पालन पर संयुक्त कार्य समूह ( JWG) कार्यरत है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के मछुआरों की तात्कालिक समस्याओं का समाधान तथा स्थायी समाधान खोजना है।
- चीन का बढ़ता प्रभाव: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाहों में चीन के बढ़ते रणनीतिक निवेश चिंता का विषय हैं।
- परियोजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता की कमी तथा बंदरगाहों के संभावित सैन्य उपयोग को लेकर भी चिंताएँ हैं।
- समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) एवं आसपास के समुद्री क्षेत्रों में समुद्री डकैती, अवैध मत्स्यन तथा तस्करी जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।
- ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समुद्री सीमाओं पर निरंतर समन्वय आवश्यक है।
- श्रीलंका की आंतरिक अस्थिरता: राजनीतिक अस्थिरता अथवा सरकार में परिवर्तन से द्विपक्षीय समझौतों एवं विकास परियोजनाओं की निरंतरता प्रभावित होती है।
- आंतरिक अस्थिरता के कारण अवसंरचना एवं आर्थिक परियोजनाओं में विलंब भी होता है।
आगे की राह
- भारत और श्रीलंका के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक संबंध हैं, जिन्हें व्यापार, रक्षा तथा विकास सहयोग और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।
- यद्यपि चीन का बढ़ता प्रभाव तथा आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
- आर्थिक एवं समुद्री सहयोग को और मजबूत करके तथा जन-से-जन संबंधों को सुदृढ़ बनाकर हिंद महासागर क्षेत्र में एक मजबूत, पारस्परिक रूप से लाभकारी एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
स्रोत: IE
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